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बीवी के कमरे से निकला हस्बैंड अपने पापा से बोला-तुम्हारी बहू का कल्याण कर दिया जाओ आख़िरी बार देख लो

फ़ोन पर किसी का पर्सनल वॉट्सऐप मैसेज है. बकायदा फैमिली ग्रुप पर 3 बजकर 18 मिनट पर इसे भेजा गया. लिखा था- 'मेरे परिवार के सारे लोग आप खुश रहें और एंजॉय करें, गुड बाय. आप लोगों के लिए ये मेरी आखिरी लाइनें हैं' और ठीक आधे घँटे बाद यानी 3 बजकर 48 मिनट पर दूसरे मैसेज का भी नोटिफिकेशन आता है. जहां लिखा गया कि...'ये सब मैंने अपनी मर्जी से किया है दिमाग खराब हो गया है मेरा, सबको नमस्कार'

मैसेज आया तो सही लेकिन फौरन बाद ही नॉन स्टॉप फोन की घंटी बजनी शुरू हो गई. जिसने मैसेज किया वो जानबूझकर फोन ना उठाने का ढ़ोंग करता रहा. मकसद बस ये कि दुनिया को बता सके कि वो किसी मुसीबत या परेशानी में है. अब जिसकी तलाश इतने लोग कर रहे थे वो खुद गुमशुदा बन पूरे शहर में घूम रहा था. इतने में कैमरे पर गुमशुदा शख़्स के पिता आते हैं और एक कहानी सुनाते हैं.

बेटे की ग़लती पर बाप के आंसू किसी से छिपाए नहीं छिपे. दरअसल जो घर से भागा वो इन्हीं का बेटा सचिन अरोड़ा है. जिसकी उम्र है यही कोई 40 साल, शादी कंचन अरोड़ा से हुई थी. 15 साल का एक बेटा ध्रुव भी था और दिल्ली की गीता कॉलोनी में इनका एक हस्ता खेलता परिवार था.

जीवन व्यापन और रोज़ की ज़रूरत पूरी करने के लिए इलाके में ही इनकी एक ग्रोसरी शॉप भी थी. लेकिन कोरोना के लॉकडाउन ने इस परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया. दरअसल कमाई के सबसे अहम श्रोत पर लॉकडाउन की चट्टान ने ऐसी चोट दी कि पूरा घर तनाव की असीम गहराइयों में समाता चला गया.

कमाई कम हो रही थी और खर्च कई गुना ज़्यादा. लेकिन ये सारी दिक़्क़तें एक साथ नहीं आई थी. दरअसल सचिन पहले एक बुक शॉप में अकाउंटेंट की नौकरी किया करता. वहां से नौकरी गई तो पिता के फैमिली बिज़नेस में सचिन ने हाथ बंटाना शुरू कर दिया. लेकिन किस्मत की ऐसी खटकी कि यहां भी भारी नुकसान के साथ पैसों की किल्लत होने लगी. अब धीरे-धीरे यही टेंशन घर की चार दीवारी में गूंजने भी लगी. बीवी अक्सर सचिन को नौकरी और पैसों के लिए ताने मारा करती, घर के बाहर कोई इनकम नहीं और घर के अंदर रोज़-रोज़ की चिकचिक से सचिन इतना बौराया कि उसने बीवी को रास्ते से हटाने का प्लान तैयार कर लिया.

शनिवार यानी 16 अप्रेल को दोपहर करीब 2 बजे सचिन दुकान से खाना खाने के लिए घर वापस आया. खाने के बाद वो मां-बाप से आराम करने की बात कह कर ऊपरअपने बीवी बच्चे के पास चला गया. काफी देर बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो मां ने सचिन को कॉल किया. और चाय पीने के लिए नीचे बुलाया. सचिन नीचे आया और उसने मां-बाप से कहा कि उसने कंचन और ध्रुव का काम तमाम कर दिया है. इतना सुनते ही जब सचिन के पिता ऊपर वाले फ्लोर पर पहुंचे तो देखा कि उनकी बहू कंचन बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी. और ज़मीन पर नीचे पोते ध्रुव की लाश पड़ी है. इससे पहले पिता ओमप्रकाश कुछ बेटे से कुछ पूछ पाते उससे पहले ही वो घर से फ़रार हो गया. दोपहर 2 बजे हुए इस कांड के बाद हत्यारे पति ने 3 बजकर 18 और 3 बजकर 48 मिनट पर फैमिली के वॉट्सएप ग्रुप पर ये दो मैसेज छोड़े.

आनन फानन में पुलिस भी भागी भागी मौका-ए-वारदात पर पहुंची. लेकिन इस कहानी का मेन विलेन इस पूरे सीन से नदारद था. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टेक्निकल सर्विलांस के जरिए सचिन को पुलिस ने आईटीओ ब्रिज से सराय काले खां की तरफ पैदल जाते हुए दबोच लिया. शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि लॉकडाउन में जॉब चली गई थी. इसके बाद वो गीता कॉलोनी में ही ग्रॉसरी शॉप चलाने लगा. मगर, आर्थिक हालात फिर भी नहीं सुधरे. इससे घर में पत्नी से झगड़ा शुरू हो गया और इससे परेशान होकर उसने गला घोंट कर पत्नी और बेटे की हत्या कर दी.

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