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Delhi Case : BMW से लेकर परेरा और सलमान खान केस की तरह कहीं कंझावला केस भी ना दम तोड़ दे, कैसे मिलेगा अंजलि को इंसाफ

Delhi Kanjhawala Murder or Accident case : दिल्ली के कंझावला में अंजलि की मौत, हत्या या हादसा, मर्डर की क्यों नहीं हो रही FIR. पढ़ें पूरी पड़ताल.

Delhi Kanjhawala Case : दिल्ली के कंझावला में अंजलि की मौत (Anjali Death) को लेकर पुलिस बार-बार सिर्फ गैर इरादतन हत्या की दुहाई दे रही है. दिल्ली पुलिस का दावा है कि कार सवार आरोपियों का इरादा हत्या का नहीं था. बल्कि  ये सड़क हादसा था जिसमें मौत हो गई. पुलिस ने पहले साफ कहा कि ये एक्सीडेंटल केस है. हादसे के 4 दिन बाद यानी 5 जनवरी को कहा कि आरोपियों को पता था कि कार के नीचे लड़की फंसी है. लेकिन फिर भी इस पर गैर इरादतन हत्या वाली धारा का ही केस रहेगा.

लेकिन सवाल ये है कि शुरुआत में भले ही अंजलि का केस महज एक्सीडेंटल था लेकिन उसके बाद वही कार सवारों को जब पता चल गया कि लड़की कार में फंसी है तो उसे बचाने के लिए बाहर नहीं निकले बल्कि कार को पहले कई बार आगे पीछे किया. इसके बाद उसे घसीटते हुए 12 किमी तक ले गए जिसमें उसकी मौत हो गई. तो क्या ये हत्या नहीं है. क्या पुलिस जिसे गैर इरादतन हत्या का केस बता रही है तो उसमें आरोपियों को कितनी सजा हो पाएगी. 6 महीने. दो साल या तीन साल या फिर ज्यादा से ज्यादा 5 साल. अब तक के कई बड़े और चर्चित केस में तो यही बातें सामने आईं हैं.

एलिस्टर परेरा केस से लेकर BMW और सलमान खान केस में क्या हुआ

पहले जानते हैं 3 बड़े उन केस के बारे में जिन्हें गैर इरादतन हत्या में कितनी सजा मिली. पहले उसे जानते हैं.

चर्चित बीएमडब्ल्यू केस : जब 10 जनवरी 1999 को पूर्व नौसेना प्रमुख एस एस नंदा के पोते संजीव नंदा ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार से फुटपाथ पर सो रहे 6 लोगों को कुचलकर मार डाला था...संजीव नंदा पर IPC की धारा 304 के तहत मुकदमा चला, और सजा हुई सिर्फ दो साल की।

एलिस्टर परेरा केस :
मुंबई में 2006 में एलिस्टर परेरा नाम के एक शख्स ने अपनी कार से सात लोगों को कुचल डाला...एलिस्टर पर भी IPC की धारा 304 के तहत मुकदमा चला...सजा मिली सिर्फ 3 साल.


सलमान खान हिट एंड रन केस :
28 सितंबर 2002 को मुंबई में एक बेकरी के बाहर सो रहे पांच लोगों को सलमान खान की कार ने कुचल दिया था। इनमें से एक की मौत हो गई थी जबकि चार घायल हो गए थे। सलमान पर भी बाकी धाराओं के अलावा IPC की धारा 304 के तहत मुकदमा चला...सजा हुई महज पांच साल की...अभी सुप्रीम कोर्ट को आखिरी फैसला सुनाना बाकी है।

ये तीन केस सिर्फ बानगी है। IPC की धारा 304 के तहत ऐसे नामालूम कितने सैकड़ों और हजारों केस जिसमें गुनहगार मामूली सज़ा के बाद बरी हो गए। अब आप सोच रहे होंगे...कि हम इन पुराने केस की गड़े मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हैं। तो इसकी वजह है IPC की धारा 304 के तहत दिल्ली के कंझावला का बिल्कुल नया केस।एक ऐसा केस जिसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ये केस गैर इरादतन हत्या यानी IPC की धारा 304 का है या फिर धारा 302 यानी हत्या का है। धारा 302 यानी हत्या के बारे में तो आप जानते ही हैं। इसमें अधिकतम सज़ा मौत से लेकर उम्र कैद तक है। अब हत्या से गैर इरादतन हत्या अलग कैसे है....और ये IPC की धारा 304 है क्या?

पूरी स्टोरी पढ़ें

आरोपियों का मकसद क्या था, हत्या या जान बचाना?

Delhi Murder Case : दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सागर प्रीत हुड्डा के हिसाब से मसला मोटिव और इंटेंशन यानी मकसद और इरादे का है। हालांकि वो खुद कह रहे हैं कि अंजलि को कार के पहियों तले कुचलकर मारने वालों को पता था कि वो उसे मार रहे हैं...इस हिसाब से मकसद और इरादा दोनों अंजलि की मौत का ही था। यही नहीं..खुद इस हादसे की इकलौती चश्मदीद भी कह रही है कि कार सवार को पता था कि वो क्या कर रहे हैं...फिर भी वो इसे 302 के लिए फिट केस नहीं मान रहे. स्पेशल कमिश्नर साहब बाकायदा बीएमडब्ल्यू केस का भी हवाला देते हैं...साथ ही ये भी कहना नहीं भूलते कि ऐसे केस पुलिस के लिए बड़े चैलेंजिंग होते हैं।

302 और 304 की बहस के दौरान मोटिव और इंटेंशन पर जोर देते हुए स्पेशल कमिश्नर साहब ये भी बताते हैं कि अब तक की तफ्तीश, पूछताछ...और कॉल डिटेल में कहीं भी अंजलि और आरोपियों के बीच कोई लिंक दिखाई नहीं दिया...चश्मदीद निधि और आरोपियों के बीच भी कोई लिंक स्थापित नहीं होता यानी कार में सवार लोगों से अंजलि और निधि अंजान थे।
हालांकि वो ये भी कहते हैं कि मामले की जांच अभी जारी है...नए सबूत..नए सुराग...सामने आ सकते हैं...मगर लगे हाथ ये भी जता देते हैं कि अंजलि केस 302 के लिए नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या यानी 304 के लिए एक फिट केस है।
हालांकि 302 की धारा एफआईआर में जोड़ने को लेकर बार बार कुरेदने पर आखिरकार उन्हें कहना पड़ता है कि पुलिस इस पहलू पर हर पहलू से विचार कर रही है साथ ही कानूनी सलाह भी ली जा रही है...

स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस डॉक्टर सागरप्रीत हुड्डा गुरुवार को अंजलि केस पर प्रेस से मुखातिब थे। हालांकि पिछली बार वो 93 सेकंड में ही अपनी बात खत्म कर चल पड़े थे। मगर गुरुवार को वो पूरी तसल्ली से हर सवाल के जवाब देते नजर आए। पर उन्होंने शुरुआत ही एक ऐसी खबर से की जो एक बार फिर दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रही है। उन्होंने बताया कि अंजलि की मौत के पांच नहीं सात गुनहगार हैं। अब ये कमाल की बात है कि नहीं...अपनी स्मार्ट दिल्ली पुलिस को हादसे के 35 घंटे बाद ये पता चलता है कि स्कूटी पर अकेली अंजलि नहीं बल्कि उसकी एक दोस्त निधि भी थी। और चार दिन बाद ये पता चलता है कि आरोपी पांच नहीं सात थे।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक चार दिन बाद जो दो नए आरोपी जन्मे हैं, उनके नाम आशुतोष और अंकुश हैं। इसमें आशुतोष वो है जो मारुति बलेनो कार का मालिक है...और अंकुश एक और आरोपी अंकित का भाई...आशुतोष पर इल्जाम है कि उसे पता था कि उसकी कार से एक्सीडेंट हुआ है...पांचों आरोपियों ने उसी रात उसे ये बात बता दी थी। लेकिन उसने ये सच पुलिस से छुपा लिया।

तो पहले तो 35 घंटे बाद दिल्ली पुलिस को ये पता चला कि स्कूटी पर एक नहीं दो लोग थे...चार दिन बाद ये पता चला कि आरोपी पांच नहीं सात हैं....और उस पर कमाल ये कि अब जाकर ये मालूम हुआ कि हादसे वाली रात कार दीपक नहीं बल्कि अमित चला रहा था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि चश्मदीद निधि का बयान 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो चुका है।
हालांकि निधि ने अपने बयान में क्या कहा ये अभी उन्हें नहीं मालूम....हादसे के बाद निधि अंजलि को मौके पर मरता छोड़कर क्यों भागी और क्यों उसने पुलिस या किसी और को इस हादसे की खबर नहीं दी...इस सवाल पर उन्होंने कहा...कि खुद पुलिस इस पर हैरान है।

हादसे वाली रात सड़क पर पुलिस की गैर मौजूदगी और पीसीआर का वक़्त पर रिस्पॉन्स न करना भी अंजलि की मौत की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। खुद पुलिस के मुताबिक करीब 12 किमी तक तीन तीन थाना इलाकों में अंजलि को पहियों तले घसीटा गया...लेकिन इस दौरान एक भी पुलिसवाला दिखाई नहीं दिया.... न ही एक चश्मदीद के कॉल पर पीसीआर ने वक्त रहते रिस्पॉन्स किया।

वैसे कुछ भी कहिए...इतना जरूर है कि जिस तरह दिल्ली वालों और मीडिया ने अंजलि को इंसाफ दिलाने की मुहिम छेड़ी उसका असर अब दिखने लगा है। पर काश दिल्ली पुलिस यही मुस्तैदी पहली रात से ही दिखा देती तो खुद की फजीहत से भी बच सकती थी।

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