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Movie tax-free: फिल्मों को क्यों मिलती है टैक्स से छूट?, टैक्स फ्री करने का क्या होता है मतलब?

The kashmir files: कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है. इस फिल्म को क्रिटिक्स से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है.

The kashmir files Movie ticket: फिल्म की रिलीज के बाद इसे लेकर कई राज्यों में टैक्स फ्री करने की मांग की जा रही है. टैक्स फ्री होने पर टिकट काफी सस्ते हो जाते हैं. आपको बता दें कि कई राज्यों में फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को टैक्स फ्री कर दिया गया है और अन्य राज्यों में इसे टैक्स फ्री करने की मांग की जा रही है.

टैक्स फ्री होने का क्या मतलब है?

The kashmir files Tax free: सिनेमाघरों में आप जो भी मूवी टिकट लेते हैं, उसके वास्तव में दो भाग होते हैं. जिसमें पहला पार्ट बेस प्राइस से आता है. दूसरा हिस्सा टिकट पर लगने वाला टैक्स है. हर मूवी टिकट का बेस प्राइस फिल्म का बजट तय करता है. वहीं, टिकट पर लगने वाले टैक्स को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच राज्य जीएसटी और केंद्रीय जीएसटी के रूप में बांटा जाता है. मूवी टिकट के लिए 2 टैक्स स्लैब हैं. अगर आप 100 रुपये तक का टिकट लेते हैं तो इससे ऊपर के टिकट पर 12 फीसदी और 18 फीसदी टैक्स लगता है.

एक उदाहरण से समझें टिकटों का गणित?

Tax free Movie: टिकटों के गणित को एक उदाहरण से समझा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में किसी भी फिल्म के टिकट पर 18 फीसदी जीएसटी वसूला जा रहा है. टैक्स फ्री होने के बाद इस पर 18 की जगह 9 फीसदी टैक्स लगेगा क्योंकि राज्य सरकार ने अपने हिस्से के 9 फीसदी हिस्से को टैक्स के दायरे से छूट दी है. इसलिए, जो 9% कर लगाया जा रहा है, वह भी केंद्र के हिस्से से है. आसान भाषा में समझा जाए तो राज्य को अपने हिस्से के कर का केवल 50 प्रतिशत ही माफ करने का अधिकार है.

क्यों मिलती है टैक्स से छूट?

आम तौर पर उन फिल्मों को टैक्स से छूट उनके सब्जेक्ट के आधार पर दी जाती है. जैसे मोटिवेशनल फिल्में, नेशनल हीरोज़ के ऊपर बनी फिल्में, सांप्रदायिक सौहार्द्र यानी कम्युनल हार्मनी को प्रमोट करने वाली फिल्में, जो अच्छा मैसेज देती हों. फिल्मों को टैक्स फ्री इसलिए किया जाता है, ताकि उसे ज़्यादा से ज़्यादा लोग देखें. अगर टिकटों के दाम कम रहेंगे, तो उस फिल्म को कम आय वाले लोग भी देख पाएंगे. ये आइडियल सिचुएशन है. मगर हम जिस दुनिया में रहते हैं, वहां कुछ भी आइडियल नहीं है.

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