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क्या होता है फॉस्फोरस बम? सफेद बम की स्याह सच्चाई, इंसानों के लिए इसलिए होता है खतरनाक

Phosphorus Bomb: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग चार महीने की हद को पार कर चुकी है। इस दौरान बहुत यूक्रेन की ज़मीन और आसमान पर टनों के हिसाब से बारूद जला, सैकड़ों टन के हिसाब से गोलिया चल चुकी हैं, और हजारों की तादाद में रॉकेट और मिसाइलों ने आसमानी रास्तों से होते हुए यूक्रेन का कलेजा छलनी किया है।

लेकिन चार महीने की हद में जंग के दौरान जिस सबसे खतरनाक चीज का इस्तेमाल रूसी सेना ने किया है वो है फॉस्फोरस बम...

यूक्रेन का दावा है कि रूसी सेना उसके सूमी इलाक़े में प्रतिबंधित फॉस्फोरस बम का इस्तेमाल कर रही है। जिससे होने वाली तबाही का अंदाज़ा अभी तक यूक्रेन और वहां की सेना नहीं लगा सकी है।

इसलिए इतना घातक होता है फॉस्फोरस बम

Phosphorus Bomb: एक सवाल तो ज़रूर उठता ही है कि आखिर ये फॉस्फोरस बम होता क्या है...और आखिर क्यों इसे इतना ख़तरनाक माना जाता है कि दुनिया भर में किसी भी जंग के दौरान इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगी हुई है।

- फॉस्फोरस एक मोम जैसा पदार्थ होता है।

- आमतौर पर ये रंगहीन होता है लेकिन कभी कभी ये हल्के पीले रंग में भी नज़र आता है।

- इसकी महक कुछ कुछ लहसुन की तरह होती है

- ये रासायनिक पदार्थ ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जलने लगता है, यानी ऑक्सीजन के साथ मिलते ही आग पकड़ लेता है।

- बम में इस्तेमाल करने पर ब्लास्ट होते ही ये एक पाउडर में बदल जाता है और हवा में फैल जाता है, हवा के संपर्क में आते ही आग की लपटों से घिर जाता है

- फॉस्फोरस के जलने पर तापमान 800 डिग्री के भी पार निकल जाता है।

- फॉस्फोरस का पाउडर हवा के संपर्क में आते ही जल उठता है, और ये तब तक जलता है जबतक पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो जाता। और जब तक जलता है अपने आस पास की तमाम ऑक्सीजन को भी सोख लेता है...

- जिस जगह इस बम का इस्तेमाल किया जाता है वहां ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है

- हवा में ये बहुत दूर तक फैल जाता है, इसलिए इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

- इंसान और जनवरों के लिए ये बम बेहद ख़तरनाक बताया गया है।

- फॉस्फोरस के कण शरीर के भीतरी हिस्से को बुरी तरह से नुकसान पहुँचाते हैं

किसी भी व्यक्ति अथवा जानवर के इस बम की चपेट में आते ही मौत हो जाती है

- अगर कोई दूर होता है तो उसकी स्किन पर इसका बुरा असर पड़ता है

- फॉस्फोरस के संपर्क में आने पर शरीर में जलन महसूस होती है

- फॉस्फोरस बम का रासायनिक पदार्थ इंसान या फिर जानवरों के मांस से चिपक जाता है जिससे स्किन पर फॉस्फोरिक पेंटाक्साइड बनता है। ये रसायन स्किन की नमी से रिएक्शन करता है। और वहां बनता है फॉस्फोरिक एसिड बनता है, जिसकी वजह से शरीर में जलन पैदा होने लगती है।

- यही फॉस्फोरिक एसिड स्किन के भीतरी हिस्से में जाकर टिशू को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। जिसकी वजह से इसका इलाज बेहद धीमा और तकलीफदेय होता है।

पहली बार प्रथम विश्व युद्ध में जापान के खिलाफ हुआ था इस्तेमाल

Phosphorus Bomb: इस बम का सबसे पहला इस्तेमाल पहले विश्व युद्ध के समय जापान के ख़िलाफ हुआ था। ब्रिटेन की सेना ने ग्रेनेड, रॉकेट और बम के ज़रिए व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल जापान की सेना और वहां के रिहायशी इलाक़ों में किया था जिसकी वजह से भारी तबाही हुई थी।

जबकि दूसरे विश्व युद्ध में नाजी सेना ने बोतल में भरकर ब्रिटिश सैनिकों के खिलाफ इसी फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था। कोरिया और वियतनाम युद्ध में भी सफेद फॉस्फोरस का बेतहाशा इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा इराक़ और सीरिया में भी इस फॉस्फोरस बम का इस्तेमाल किया जा चुका है।

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