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what is child abuse? बाल अपराध क्या होता है? इससे बचने के क्या उपाय हैं?

बाल अपराध क्या होता है? what is child abuse?

What is Child abuse? बाल अपराध का मतलब है बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध से। बच्चों को मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों से परेशान किया जाता है। जो लोग बच्चों के साथ अपराध करते है, उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और अन्य एक्ट के तहत मामले दर्ज होते हैं। बच्चों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2017 से 2020 तक ऑनलाइन बाल शोषण के 24 लाख से अधिक मामले भारत में सामने आए। इनमें लगभग 80% मामले 14 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ हुए। यानी साफ है कि बच्चों में भी लड़कियों के साथ ज्यादा अपराध होता है।

बाल अपराध के कितने प्रकार है? types of child abuse?

बाल अपराध दो प्रकार के होते हैं। पहला शारीरिक और दूसरा मानसिक। पहले आपको बताते हैं कि मानसिक प्रताड़न क्या होती है?

मानसिक प्रताड़ना : जब किसी बच्चे से ऐसी बाते की जाती हैं जिससे उसके दिमाग पर बुरा असर पड़े जैसे वो डरे या चिंतित होने लगे। ऐसे अपराधों को मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में रखा जाएगा।

अब दूसरा है शारीरिक उत्पीड़न।

शारीरिक प्रताड़ना : जब किसी बच्चे को अनुचित तरीके से अनुचित जगहों पर छुआ जाए, उसके साथ मारपीट की जाए आदि शारीरिक प्रताड़ना में आती है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

what is child abuse : सांकेतिक तस्वीर

बाल शोषण के कारण? Reasons Behind child abuse?

बाल शोषण के कई कारण हो सकते हैं। जो परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उनके बच्चों के साथ ज्यादा अपराध होता है, क्योंकि वहां शिक्षा की कमी के साथ पैसों की भी तंगी होती है। कई ऐसे परिवार भी है, जहां सदस्यों के बीच मारपीट की नौबत आ जाती है। ऐसे में परिवार का मुखिया कई बार बच्चों पर भी हाथ उठाने में गुरेज नहीं करता है। कई बार परिवार काफी बढ़ा होता है, इस वजह से बच्चों के साथ अपराध घठित हो जाता है। कई बार बच्चे से पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें होती है, जब बच्चा ऐसा नहीं कर पाता है तो भी बच्चों के साथ कई बार हिंसा होती है। कई बार परिवार के सदस्यों पर काम का ज्यादा दबाव होता है, इस वजह से अगर बच्चे परिवार को परेशान कर रहे होते हैं तो भी उनके साथ हिंसा हो जाती है।

बाल शोषण रोकने के उपाय ? measures to prevent child abuse?

बच्चे के साथ अगर अपराध हो रहा है तो मान लीजिए इसके लिए मां-बाप ज्यादा जिम्मेदार है, क्योंकि ये मां-बाप पर ही निर्भर करता है कि वो अपने बच्चों की देखभाल किस तरह से कर रहे हैं? कई बार छोटी-छोटी बातों पर मां-बाप को गुस्सा आ जाता है और वो बच्चे की पिटाई कर देते हैं। इस तरह से नहीं होना चाहिए। दूसरा, अपने बच्चों को दोस्त बना कर रखे। उनसे हरेक बात करे। उनको सही-गलत का फर्क बताएं। उनको मोटिवेट करे। उनको सही-गलत का फर्क बताएं।

बाल शोषण कानून क्या है? child abuse laws?

बच्चों के साथ शोषण हो तो ये किस कानून के अंतर्गत आता है। दरअसल, हाल ही पॉक्सो एक्ट बनाया गया है। ये सीधे-सीधे बच्चों के खिलाफ अपराध में डील करता है। भारतीय दंड संहिता में भी ऐसी कई धाराएं है, जो सीधे-सीधे बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध से संबंधित है। इसके अलावा कई स्पेशल एक्ट भी बच्चों के अधिकारों को संरक्षित करते हैं। इसमें शामिल हैं - POCSO अधिनियम, 2012, नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम 2006, बाल श्रम अधिनियम (निषेध और विनियमन), 2008।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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