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समंदर के अंदर मिली दूसरी दुनिया, क्या है रहस्य?

धरती पर ही एक दुनिया और भी है, ये दुनिया समुद्र की गहराईयों में छुपी है। जहां सूरज की रौशनी का भी पहुंचना मुश्किल है वहां मिले हैं ज़िंदगी के ज़िंदा निशान, अगर आपको लगता है कि महासागरों की तलछटी तक ही ज़िंदगी है तो आप गलत हैं। तलछटी और उसकी चट्टानों के नीचे भी जीवन है, न यहां कोई आ सकता है और न जा सकता है। आज से पहले इसके बारे में न तो किसी को पता था और शायद कभी पता चल भी न पाता। अगर सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक मार्क लीवर प्रशांत महासागर की गहराई में घुसकर समुद्री चट्टाना का ये टुकड़ा न लाए होते।

क्या है दूसरी दुनिया का रहस्य?

ये टुकड़ा नहीं धरती पर ही दूसरी दुनिया का वो प्रमाण है जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को हैरान कर रखा है, समुंद्र के अंदर दूसरी दुनिया का पता बताने वाले इस पत्थर से आने वाले दिनों में पाताल नगरी के कई औऱ राज़ खुलने की पूरी संभावनाएं न सिर्फ सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक मार्क लीवर को नज़र आती है बल्कि बाकी वैज्ञानिकों का भी यही मानना है। प्रशांत महासागर की तलछट पर करीब ढ़ाई किलोमीटर के दायरे में मिले चट्टानों के टुकड़ों के डीएनए से और इसपर चिपके हुए खनिज और छोटे जीव ये साबित कर रहे हैं कि समंदर के अंदर भी दूसरी दुनिया है। हालांकि ये दावा काफी दिनों तक इस चट्टान की रिसर्च के बाद किया जा रहा है। मार्क लीवर ने ये दावा चट्टानों के उन नमूनों के आधार पर किया है जो उन्हें प्रशांत महासागर के पश्चिमी तट से बहुत दूर समुद्र के बेहद निचले तल से लिए हैं। मार्क लीवर को ये नमूने उन जीवों और खनिजों के हैं जहां न तो रौशनी है न हीं वहां रौशनी पहुंचने के कोई आसार हैं।

समंदर के अंदर और कितने राज़?

प्रशांत महासागर जितना गहरा है उतना ही रहस्यों से भरा हुआ है, अब क्या डॉक्टर लीवर को मिला चट्टान का टुकड़ा दूसरी दुनिया की रहस्यों से पर्दा हटा पाएगा, क्या ये छोटा सा चट्टान का टुकड़ा दूसरी दुनिया के दरवाज़े की चाबी साबित हो सकेगा। प्रशांत महासागर की चट्टानों पर मिले खनिज औऱ छोटे जीव के निशान अगर ये साबित करने में कामयाब हुए कि यहां भी जीवन है तो विज्ञान का नियम ही बदल जाएगा, क्योंकि ये निशान जहां मिले हैं वहां सूरज की रौशनी भी नहीं पहुंचती है। डॉक्टर लीवर ने ये नमूने उन जगहों से लिए हैं जो पूरी तरह से दुनिया से कटे हुए हैं, जहां ज़िंदगी मिलना तकरीबन नामुमकिन सा है।

नार्थ कैरोलीना में रिसर्च कर रहे सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक मार्क लीवर के मुताबिक गहरे समुद्र की गहराईयों में दफ्न जीवन का ये पहला प्रमाण है और इस बात के प्रमाण भी है कि गहरे समुद्र में छुपी एक दुनिया और भी है। इससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि प्रशांत महासागर में जहां रौशनी भी नहीं पहुंच पाती है वहां भी ज़िंदगी है। वैज्ञानिकों के निष्कर्ष के मुताबिक ये जगह बताती है कि यहां ज़िंदगी जीने लायक स्थिति है क्योंकि इन छोटे जीवों और खनिजों के प्रमाण बताते हैं ऐसे जगह पर सूरज की रौशनी के बिना भी जीवन मिल सकता है। वैज्ञानिक प्रमाण है कि जीवन उसी जगह पर होता है जहां सूरज की रौशनी पहुंचती है। क्योंकि फोटोसेथेसिस के ज़रिए जीव सूर्य की रौशनी का इस्तेमाल कार्बनडाईऑक्साइड को ऑक्सीज़न में तब्दील करने के लिए करते हैं।

क्या ये करिश्मा है?

प्रशांत महासागर की भूरभुरी तलहटी में जीवन होना किसी करिश्मे से कम नहीं है, यहां जीवन के जो प्रमाण मिलें हैं उनकी वजह पानी के अलावा वो खनिजों का वो स्रोत है जो बहुत छोटे रूप में मौजूद है। डॉक्टर लीवर को जीवन के ये नमूने प्रशांत महासागर के 55 किलीमीटर की गहराई में मिले हैं पत्थर के ये नूमने। जिसमें छोटे जीव पाए गए हैं, डॉक्टर लीवर के मुताबिक समुद्र की गहराई में मिली ये चट्टान साढ़े तीन लाख साल पुरानी हो सकती है, लेकिन ये जीवाष्म ऐसे हैं जिनकी खोज पहले कभी नहीं की गई थी। हालांकि डॉक्टर लीवर के मुताबिक अभी शुरूआती जांच में फिलहाल इतना ही पता चल सका है लेकिन जैसे जैसे इसकी और बारीकी से जांच की जाएगी हो सकता है इस चट्टान के ज़रिए कई हैरान करने वाले तत्व सामने आएं और आने वाले दिनों में चट्टान के इस टुकड़े की रिसर्च पूरी होने के बाद दूसरी दुनिया के कई और राज़ खुल सकते हैं।

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