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आख़िर कहां और कैसे काटे हाथ-पांव? शरिया क़ानून के तहत सज़ा के तौर तरीक़े तय करने में जुटा तालिबान

अनगिनत लोगों को संगसार कर यानी पत्थरों से मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया था. अब बीस साल बाद तालिबान एक बार फिर से अपना वही ख़ूनी इतिहास दोहराने जा रहा है. तालिबान ने एक तरफ़ जहां लोगों को भयानक मौत देने के साथ-साथ उनकी लाशें फिर से चौक-चौराहों पर टांगने की शुरुआत कर दी है, वहीं उसने साफ़ कर दिया है कि अब वो फिर से लोगों को अलग-अलग जुर्म के बदले में हाथ-पैर काटने या फिर संगसार कर मौत के घाट उतारने की सज़ा देगा.

वैसे तो अफ़गानिस्तान में तालिबान की वापसी के साथ ही लोगों को ये डर सताने लगा था कि तालिबान कहीं फिर से अपने पुराने दिनों में ना लौट आए, जब वो बेहद क्रूर और गैर इंसानी तरीक़ों से लोगों पर राज किया करता था. लेकिन अपनी दूसरी पारी में तालिबान ने कई बार दुनिया को ये बताने की कोशिश की कि वो अब पहले वाला तालिबान नहीं है, जो छोटी-मोटी और मामूली बातों पर लोगों को भयानक सज़ा दे. कभी तालिबान ने महिलाओं को काम करने की आज़ादी देने का वादा किया, तो कभी नए सरकार में हर तबके के लोगों को जगह देने की बात भी कही. लेकिन अब जैसे-जैसे वक़्त गुज़रता जा रहा है तालिबान की असलियत सामने आती जा रही है. उसने साफ़ कर दिया है कि अब वो पहले की तरह ही शरिया क़ानूनों के हवाले से लोगों से पेश आने जा रहा है.

तालिबान की बुनियाद रखनेवाले आतंकियों में से एक मुल्ला नूरुउद्दीन तुराबी ने एक इंटरव्यू में ये साफ़ किया है कि फांसी पर लटकाए जाने के साथ-साथ तालिबान जल्द ही और शरीर के अंगों को काटने की सजा फिर से अफगानिस्तान लागू करने जा रहा है. हालांकि इस बार ऐसी सज़ाओं के सार्वजनिक प्रदर्शन का फिलहाल उनका कोई इरादा नहीं है. कहने का मतलब ये है कि वो काटेंगे तो ज़रूर, लेकिन सबके सामने नहीं बल्कि लोगों की निगाहों से दूर पर्दे के पीछे. तालिबान ने कहा है कि सभी लोगों ने स्टेडियम में सजा देने की उनके फैसले की आलोचना की, लेकिन तालिबान ने कभी दूसरों के कानूनों और सजा के बारे में कुछ नहीं कहा. लिहाज़ा, दुनिया को भी ये नहीं बताना चाहिए कि उनके कानून कैसे होने चाहिए. मुल्ला नुरुद्दीन तुराबी ने कहा कि वो इस्लाम का पालन करेंगे और अपने कानून कुरान के आधार पर भी बनाएंगे.

ऐसा नहीं है कि तालिबान सिर्फ़ कुरान और शरिया क़ानूनों को हु ब हू लागू करने के लिए दोबारा ऐसी सज़ाएं लाने जा रहा है, बल्कि तालिबान का ये मानना है कि समाज हाथ-पांव काटने से समाज में जुर्म की वारदातें कम होती हैं और इससे लोगों में सुरक्षा की भावना भी पैदा होती है. तालिबान नेता मुल्ला नूरउद्दीन ने कहा कि तालिबान की कैबिनेट अभी इस मसले पर विचार कर रही है कि क्या इन सजाओं को सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए या नहीं? इसके बारे में तालिबान एक नीति बनाने की तैयारी कर रहा है.

70 से ज़्यादा उम्र का ये तालिबानी नेता पिछली सरकार में मिनिस्टर पर जस्टिस यानी क़ानून मंत्री था. तब उसके जिम्मे मजहब से जुड़ी नीतियों को लागू करने के साथ-साथ गुनहगारों को सज़ा दिलाना था. और उन दिनों में अफ़गानिस्तान के ईदगाह मैदान से लेकर स्पोर्ट्स स्टेडियम तक में ऐसी सजाएं आम बात थीं. चोरी डकैती के मामलों में कई बार हाथ-पैर काट डाले जाते थे, जबकि कुछ मामलों में तो सिर ही धड़ से अलग कर दिया जाता था. उन दिनों में इंसाफ़ के नाम पर तालिबान ने कई बार पीड़ित परिवारों के हाथों में बंदूकें थमाईं और उनसे कथित गुनहगारों के सिर में सार्वजनिक रूप से गोलियां भी चलवाईं. लेकिन उन्हीं दिनों से तालिबान की जो दुनिया भर में लानत मलामत शुरू हुई, वो अब भी जारी है.

लेकिन ये तो सिर्फ तालिबान के बैक टू बेसिक्स की सिर्फ़ एक मिसाल भर है. तालिबान और भी ऐसा बहुत कुछ करने जा रहा है, जिसे जानकर आपको यकीन हो जाएगा कि उसने अफ़गानिस्तान को सालों नहीं बल्कि सदियों पीछे ले जाने की पूरी तैयारी कर रहा है. तालिबान ने अब सैलून मालिकों को कह दिया है कि वो लोगों की दाढ़ी की शेविंग और ट्रिमिंग करना फ़ौरन बंद कर दे. अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा करते ही तालिबान ने कई ब्यूटी पार्लर्स के बाहर छपे महिलाओं के पोस्टर्स पर कालिख पोत दी थी और अब तो वो इससे भी दो कदम आगे निकल चुका है. उसने अफगानिस्तान के हेलमंद सूबे में हेयरड्रेसर को दाढ़ी ट्रिम करने या दाढ़ी शेव करने पर बैन लगा दिया है.

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के कुछ नाइयों ने भी कहा है कि तालिबान ने उन्हें भी कुछ ऐसा ही अल्टीमेटम दिया है. तालिबान का कहना है कि दाढ़ी बनवाना या उसे ट्रिम करना इस्लामी कानूनी के खिलाफ़ है, ऐसे में जो भी इन नियमों की अनदेखी करेगा उसे सजा दी जाएगी. तालिबान का दावा है कि ऐसा आदेश जारी करने से पहले उसके इस्लामिक ओरिएंटेशन मिनिस्ट्री के अफ़सरों ने लश्कर गाह में जाकर कई सैलूनवालों के साथ मीटिंग भी की. यहां तक कि तालिबान ने सैलून के अंदर किसी भी तरह का म्यूजिक या गाना बजाने पर भी पाबंदी लगा दी है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल के हज्जामों के पास तालिबान के लड़ाके कई-कई बार आ रहे हैं और उन्हें कहा जा रहा है कि लोगों की दाढ़ी ना तो काटी जाए और ना ही उसे ट्रिम किया जाए. इसके अलावा 'अमेरिकन हेयरस्टायल' या स्टायलिश अंदाज में बाल काटने की चाह रखने वाले लोगों को भी हेयरकट के लिए मना किया जाए. अब ज़ाहिर है ऐसे अजीबोग़रीब फरमानों से अफगानिस्तान के सैलून मालिकों को धंधा चौपट होने का है डर सताने लगा है. ज़िक्र ए ख़ास है कि 1996 से 2001 के बीच भी तालिबान ने कुछ ऐसा ही फरमान जारी किया था.

अभी पिछले हफ्ते ही तालिबान एक बार फिर बर्बरता के मामले में सारी हदों से आगे निकल गया. अफगानिस्तान के हेरात शहर में आतंकियों ने एक लाश को क्रेन से लटका दिया. एक चश्मदीद ने शनिवार को बताया कि एक लाश शहर के मुख्य चौराहे पर लटकाकर रखी गई थी. तालिबानी आतंकी चौराहे पर लटकाने के लिए कुल चार लाशें लेकर आए थे. लेकिन बाद में उन्होंने एक शव को ही वहां क्रेन से लटकाया और बाकी के तीन शव शहर के दूसरे चौराहों पर लटकाने के लिए ले गए. शक है कि तालिबानी लड़ाकों ने इन लोगों को अगवा कर उनकी जान ली थी. हालांकि शव टांगने वाले आतंकियों का कहना था कि वो ऐसे गुनहगार थे, जो पुलिस की गोली से मारे गए.

ध्यान देनेवाली बात ये है कि एक तरफ़ तो तालिबान ऐसी अजीबोग़रीब हरकतें और सजाओं की बात कर रहा है वहीं दूसरी तरफ़ वो यूएन में अपनी भागीदारी चहता है.यूएन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को 15 सितंबर को मौजूद अफगान राजदूत गुलाम इसाकजई की तरफ से ये प्रस्ताव मिला... इसमें महासभा के 76 वें वार्षिक सत्र के लिए अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमण्डल की सूची दी गई थी. यूएन के प्रवक्ता की मानें तो 5 दिन बाद गुटेरेस को इस्लामी अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के लेटरहेड के साथ एक और पत्र मिला, जिसमें अमीर खान मुत्ताकी की ओर से ‘विदेश मंत्री’ के तौर पर किया गया हस्ताक्षर था. इस ख़त में तालिबान ने कहा था कि 15 अगस्त को अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट अशरफ गनी को हटा दिया गया था और पूरी दुनिया अब उन्हें राष्ट्रपति नहीं मानती.ऐसे में इसाकजई अब अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.तालिबान ने कहा कि वो यूएन के एक नए स्थाई प्रतिनिधि के तौर पर मोहम्मद सुहैल शाहीन का नाम भेज रहा है, जो कतर में शांति वार्ता के दौरान तालिबान का प्रवक्ता रहा है.

वैसे दूसरों के लिए सख्त कायदे क़ानून बनानेवाले तालिबानियों के अब खुद उसके लड़ाके ही मुसीबत का सबब बनते जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने अपने लड़ाकों को चेतावनी दी है कि टूरिस्ट स्पॉट्स पर जाकर ना तो इंजॉय करें और ना ही सेल्फी क्लिक कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करें क्योंकि ऐसा करना उनके संगठन की इमेज के लिए खतरनाक हो सकता है. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, जब तालिबानी लड़ाके ड्यूटी पर नहीं होते हैं, तब वे हाथ में बंदूक लिए पिकनिक के लिए जाते हैं या फिर एम्यूजमेंट्स पार्क घूमते हैं. अफगानिस्तान के दूसरे हिस्सों से भी कई तालिबानी लड़ाके काबुल आ रहे हैं और इस जगह पर मौजूद टूरिस्ट्स प्लेस का मजा ले रहे हैं. तालिबान के आला नेताओं को ये रास नहीं आ रहा है. यही वजह है कि तालिबान के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने अपने लड़ाकों को फटकार लगाई है.

मोहम्मद याकूब ने अपने लड़ाकों के साथ बातचीत में कहा "तुम्हें जो काम दिया गया है, तुम्हें उसी पर फोकस करना है. तुम हमारे स्टेटस और इमेज को बर्बादियों की तरफ ले जा रहे हो. हमारा ये रूतबा और ओहदा जो सैंकड़ों शहीदों के बलिदान के बाद हमें मिला है, इसे तुम खराब करने की कोशिश मत करो. खासतौर पर वो लड़ाके संभल जाएं, जो अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं."

मोहम्मद याकूब सेल्फी लवर्स तालिबानी लड़ाकों के साथ-साथ आतंकियों से भी ज़्यादा ही नाराज़ है जो इस्लामिक तौर-तरीके के हिसाब से कपड़े नहीं पहन रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के कई लड़ाके ऐसे भी हैं जो मिरर सनग्लासेस पहन रहे हैं और स्टायलिश कपड़े भी पहन रहे हैं जिनमें हाई-टॉप स्नीकर्स भी शामिल हैं. याकूब ने कहा कि ये वॉरलॉर्ड्स और अपराधियों का पहनावा है जो अफगानिस्तान में अमेरिका की कठपुतली सरकार में एक्टिव थे और अगर हमने भी उनकी तरह ही व्यवहार करना जारी रखा, तो हम अपना इस्लामिक कल्चर और इस्लामिक सिस्टम पूरी तरह से खो देंगे.

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