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जुए के खेल में नोट पर लगी चिप कर रही थी कमाल हर बाजी के साथ खेलने वाला होता जा रहा था कंगाल

हमीरपुर से संवाददाता नाहिद अंसारी की रिपोर्ट

कहते हैं जुर्म की दुनिया के भी कुछ धंधे ऐसे होते हैं जिनमें बेहद ईमानदारी रखी जाती है। खासतौर पर जुआ और सट्टे का धंधा ऐसा होता है जिसमें खेलने वाला और खिलाने वाला दोनों अपनी जुबान पर कायम रहते हैं। कोई भी किसी के साथ बेईमानी करने की सोचता तक नहीं है । हालांकि बदलते वक्त के साथ हर काम में लोगों का लालच और बेईमानी ने घर कर लिया है। मेरे लिखने का मतलब यहां पर हरगिज ये नहीं है कि जुआ या सट्टा खेलना अच्छी बात है बलकि बात हो रही है पुलिस की गिरफ्त में आए एक ऐसे गैंग की जिसने जुआ खेलने वालों को चूना लगाने की एक नायाब तकनीक निकाल ली थी।

उत्तर प्रदेश की हमीरपुर पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि हमीरपुर के विवेक नगर के एक घर में जुआ खेला जा रहा है। पुलिस ने इस अड्डे के बारे में और भी पता करना शुरु किया तो पता चला कि जुए का ये अड्डा काफी दिन से यहां पर चल रहा है ।

हर रोज यहां पर लाखों रुपयों का जुआ खेला जाता है। हमीरपुर पुलिस एक टीम तैयार कर जुए के अड्डे पर छापेमारी करती है। पुलिस की इस छापेमारी में छह लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

पुलिस मौके से जब्त रुपयों को जब सील कर रही थी तो उन्हें पांच सौ रुपये की गड्डी के बीच के एक नोट में एक चिपनुमा चीज लगी हुई दिखी। पुलिस ने वो नोट निकाला और उसकी ध्यान से जांच की लेकिन पुलिस को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर ये चिप क्या है और नोट पर लगाने का मकसद क्या है और ये किस काम आती है।

इस जुए के अड्डे को गोपाल नाम का लड़का चला रहा था। अब पुलिस ने गोपाल से पूछा कि ये चिप नोटों की गड्डी के बीच क्यों लगाकर रखी है । गोपाल के जवाब के बाद सामने आया कि कैसे जुए के धंधे में भी लोगों ने हाईटेक तरीके से ठगी की वारदात को अंजाम देना शुरु कर दिया है।

पुलिस ने इस गैंग के छह लोगों को गिरफ़्तार किया है

नोटों की गड्डी के बीच लगा रखी थी हाईटेक चिप

वैसे तो जुआ किस्मत का खेल माना जाता है लेकिन कुछ लोग पत्तों में हेरफेर कर भी अच्छे पत्ते अपने पास ले आते हैं लेकिन यहां पर तो कहानी बिल्कुल हाईटेक थी। जो चिप पुलिस ने नोट से बरामद की दरअसल वो एक माइक्रो कैमरा था। गोपाल और उसके साथी नोटों की गड्डी के बीच के एक नोट में ये चिप लगा देते थे। गोपाल या उसके साथी जब जुआ खेलते तो उनमें से एक गोपाल के सामने जुआ खेल रहे शख्स के पीछे नोटों की गड्डी लेकर खड़ा हो जाता।

हाथ में केवल नोट की गड्डी होने की वजह से किसी को उस पर शक ही नहीं होता था। नोटों की गड्डी में लगी चिप ब्लूटूथ से गोपाल के मोबाइल से जुड़ी रहती । इसकी मदद से गोपाल आराम से सामने जुआ खेल रहे शख्स के पत्ते देख लिया करता था। अगर सामने वाले के पत्ते अच्छे होते तो वो बाजी जल्दी खत्म कर दिया करता था लेकिन अगर पत्ते बेकार होते तो वो ज्यादा से ज्यादा रुपयों की बाजी खेलता।

इस माइक्रो कैमरा की मदद से गोपाल अभी तक कई लोगों को जुए की बाजी में लाखों रुपयों का चूना लगा चुका है। ये पहली बार है कि जुए के खेल में किसी माइक्रो कैमरा का इस्तेमाल सामने आया है। इस खुलासे के बाद खुद पुलिस हैरान है कि कैसे खूंखार से खूंखार और छोटे से छोटे अपराधी वारदात को अंजाम देने के लिए तकनीक को अपना हथियार बना रहे हैं। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार किए सभी आरोपियो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है।

यूं तो जुआ खेलने में पकड़े जाने पर आसानी से जमानत मिल जाती है लेकिन जिस तरीके से हाईटेक गैजेट्स का इस्तेमाल इस जुए के अड्डे पर किया जा रहा था उसमें पुलिस आईटी की भी कोई धारा जोड़कर इन जुआरियों को लंबे वक्त तक जेल की सलाखों के पीछे रख सकती है।

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