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ABG Shipyard Case : सीबीआई ने 22 हजार करोड़ के बैंक फ्रॉड में पूर्व CMD से की पूछताछ

ABG Shipyard Fraud case: देश में हुए सबसे बड़े बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड के पूर्व सीएमडी से 21 फरवरी को पूछताछ की. कंपनी के पूर्व सीएमडी ऋषि अग्रवाल पर 22 हजार करोड़ रुपये के बैंकिंग फ्रॉड का आरोप है. उसे आज पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित सीबीआई हेडक्वार्टर बुलाया गया था. बता दें कि ऋषि अग्रवाल ABG Shipyard के पूर्व चेयरमैन और एमडी भी रह चुके हैं.

इससे पहले, पिछले हफ्ते भी सीबीआई ने इस आरोपी से पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी आरोपी का बयान दर्ज किया जाएगा. दरअसल, सीबीआई टीम ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ में बताए गए विभिन्न पहलुओं पर उनका बयान दर्ज कर रही है.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने 17 महीने पहले 25 अगस्त, 2020 को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर इस मामले में 7 फरवरी, 2022 को एफआईआर दर्ज की थी.

सीबीआई ने तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया तथा एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। ये आरोप भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत लगाए गए हैं।

सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद 12 फरवरी को 13 स्थानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई अधिकारियों ने दावा किया कि उन्हें कई ठोस दस्तावेज मिले थे, जिनमें कंपनी के खाते शामिल हैं और उनकी जांच की जा रही है।

बैंक ने सबसे पहले आठ नवंबर, 2019 को एक शिकायत दर्ज करायी, जिस पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने 12 मार्च, 2020 को कुछ स्पष्टीकरण देने को कहा था।

बैंक ने उसी साल अगस्त में एक नयी शिकायत दर्ज करायी थी। सीबीआई ने डेढ़ साल से अधिक समय तक 'जांच' करने के बाद शिकायत पर कार्रवाई की तथा सात फरवरी, 2022 को प्राथमिकी दर्ज की।

अधिकारियों ने कहा कि बड़े पैमाने पर डाटा और रिकॉर्ड के साथ मामला बड़ा था, क्योंकि 28 बैंक इसमें शामिल थे और प्राथमिकी के साथ आगे बढ़ने से पहले सत्यापन की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि ‘अर्न्स्ट एंड यंग’ द्वारा किए गए ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ से पता चला है कि 2012-17 के बीच, आरोपियों ने मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों में शामिल हुए।

यह सीबीआई द्वारा दर्ज बैंक धोखाधड़ी का सबसे बड़ा मामला है। एजेंसी के अनुसार, धन का इस्तेमाल बैंकों द्वारा जारी किए गए उद्देश्यों के अलावा अन्य प्रयोजनों के लिए किया गया।

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